जब आये लब पे तो दुआ कीजिए । हमारे लिए भी चंद अल्फाज अपनी जुबां कीजिए ।
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6 comments
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Replyआदरणीय शास्त्री जी।
Replyआपने मेरी लिखी रचना को चर्चा के काबिल समझा उसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
Very Nice.
ReplyThanks Anil ji
Replyबहुत ख़ूब !सुंदर रचना "एकलव्य"
Replyहमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है ध्रुव जी।
Replyइस नाचीज़ की रचना पर प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद।
जब आये लब पे तो दुआ कीजिए ।
हमारे लिए भी चंद अल्फाज अपनी जुबां कीजिए ।
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शुक्रिया,,,,,
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